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झीलां रे पाणी ज्यू लोगां रो मन भी लेहरां लेवे

– ऋतुराज –

धरती रो सरग उदैपुर, अणीरी विशेष जग्यां ने बसावट रे कारण और अणीरी झीलां रे खातर पूरी दुनिया रा लोगां में आकर्षण रो केन्द्र है। धरती रा अणी सरग री खूबसूरती ने सावण भादवा में चार चांद लाग जावे। अणी सैर री झीलां पाणी ऊं पूरी भर जावे ने अणी ने आपरी कोख में पालन पोषण करवा वाली आड़ावल री मगरियां पूरी हरी भरी वेई जावे, जणी दांण अणी री लीला न्यारी ई लागे।

परदेसी मनख तो अणी री खूबसूरती ने नरखवा ने अठे आवे ने आवता ई वे देकता ई रई जावे। परदेसी तो परदेसी है पण अणी सैर रा मनक अण धरती रे रंग में अणी भांत रंग्योड़ा है के वै भी सावण भादवा में पूरा वैण्डा वैई ग्या है। ज्यूं-ज्यूं वरखा वेती जाइरी है अणा मनखा रे मन में ओ हुलास वदतो ई जाई रियो है के पीछोला ने फतेसागर में अबार तक कतरो पाणी आयो। वरखा वरसता ई मगरा ने मगरियां मखमली झालर ऊं ढंक गी है ने ऐड़ी हाउ लागी री है ज्यूं के कोई लाड़ी ब्याव रे टेम कसी सजधज ने तीयार व्हैवे। हरियाली रो मजो लूटवा ने अणी सैर रा ई नी पूरा मेवाड़ रा मनक ठौड़ ठौड़ गोठ जमाई रिया है। अणी गोठां में सब जात धरम रा मनक आप आपारी मित्र मंडली रे हातै भेला व्हैईने मजा लूटवा री कई कसर बाकी नी राकी रिया है। छोरा-छोरियां, धणी-लुगाई, टाबर-टींगर, मोटियार जवान ने दाना मनक हगला ई अणी मौसम में असतर वैण्डा वैई रिया है के ज्यूं भंवरा फूलां री कियारियां में जाई ने मस्त वैई जावे।

पीछोला में पाणी रे चढ़ाव रे साथै अणी धरती रा लोगां री उमंगा और उत्साह भी परवान चढ़तो लागे। हवेरे हांजे जाई जाई ने झीलां ने नरखे ने मन में तसल्ली देवे के अणी साल इंदर राजा म्हारे देस माते घणो मेरबान ने राजी व्हीयो है। म्हारे उदैपुर री झीलां भर जावे जदी म्हांने पूरी तसल्ली व्हैवे ने जीव ने साता पड़े। ज्यूं-ज्यूं पीछोला ने फतेहसागर रा पाणी में हीलौरा उठे त्यूं-त्यूं अण परकरती परेमी जीवां रे मन में भी मौज री लेहरां उठे। ”पीछोलो लेहरां लेवे राज, म्हारे समदरियो लेहरां लेवे राज” रा झीलां सुं जुडिय़ा थका गीत नवा जूना मनका री जबान माथे ताजा वई रिया है। पूरा सैर रे मन में अबार एक ई मनोकामना है के मारी झीलां छलकणी चावै। छलकी गी। लोग अणी वास्ते घणी बोलमा कीदी ने घणी अरदास-दुवा मांगी है। मन री वात पूरी व्हेवै तो ज्यूं वरखा विया रे पछे हुका आला झाड़का ने नवो जलम कणी तरीका ऊं मले वणीज तरीयां म्हारे सैर रा लोगां ने भी नवो जोश नवी उरजा ने नवो जीवण मली जाएगा।

यूं तो पूरो राजस्थान ई हरियाली रे मौसम में हीण्डा घाल ने सावण भादवा रा पूरा मजा लेवे पर मेवाड़ तो अनूठौ ही है। अठे हरियाली अमावस रा मेला ने सुखिया सोमवार रा मेला जगा जगां भरीजे जणी में हजारां लाखां री तादाद में मनकां री रैलमपेल एक अलग ही मौजी संस्कृति ने परंपरा री झलक देवे। आ अणी मेवाड़ी माटी री तासीर ई है के अठे रा लोग अणी हरियाली ने परकरती रा रंगा रो पूरो मजो लेवे ने मजो भी अस्यो लेवे के अणी आनंद में परकरती रे हातै एक मेक व्हैई जावे।

अठे रा लोग घणा भागसाली है जणा ने झीलां भरवां रो ने भरी थकी झीलां देखवा रो सुकन मली रियो है। अठे रा जो परवासी मनक परदेस में रेवे वे भी फोन माथे ने अखबारां में घर जिनायत री खबर लेवे के नी लेवे पर झीलां भरवा री खबर पेलां लेवे। परदेसी मनक भी मेवाड़ रे मनकां रे मन री वात हमजे अणी वास्ते जदी मेवाड़ के उदैपुर रा लोगां ऊं वात करे तो पैली पूछे के झीलां भराई गी,  मौसम कस्यो है।

वरका में उदैपुर रा ताल तलैया भरीज जावे वणी पछे अठे रा ने परदेस रा मेहमाना रे आवा रो सिलसिलो हरू वेई जावे। दीवाली आता आता तो अण सैर में रैलमपेल वैई जावे ने होटलां में भी ठैरवारी जग्या नी मिले।

धन्य हां म्हां लोग जो अणी धरती रा सरग में रैई रियां हां। लोग तो अठे आवा वास्ते ई तरसे। अठे जो एक बार आई ग्यो व्हो मनक अठे ऊं छोडऩे जाई नी सके। कैवे के पीछोला रो पाणी पाछो लावे। अणी पाणी री ने इं धरती री आई तासीर है। अणी वात रे लारे ई आ कैवत भी पड़ी के ‘गेउं नी मले तो मक्की खाणो पण मेवाड़ छोडऩे कठेई नी जाणो। बारला लोग अठे आवे जदीज वणां ने खबर पड़े के ई मेवाड़ी मनक अण धरती ऊं अतरो मोह क्यूं राखे।

आ मगरां री धरती, आ राणा परताप री धरती, आ पूंजा री धरती, आ भामाशाह री धरती, आ वीरां री धरती, आ मीरां री धरती म्हारे हिवड़े सूं प्यारी लागे। म्हने घणी चौखी लागे ओ घणी चौखी लागे। इं धरती रो बखाण हुण ने बारली छेटी छेटी री जगांऊ  नराई मनक आइने अठे वस गिया है और वी अठे रेवाऊं राजी है। अठा री हरियाली, चौखी बनावट री झीलां अर मेरे कोरे रा तलावां ने निरखी ने वी राजी व्हैता रेवे। अठारे मनखां रो सम्प भी वणाने रास आई ग्यो। झीलां लबालब वे ने छलकवा लागी गी है.

This article written in the Mewari (Rajasthani) language. It explains all about the city of lakes Udaipur and the culture. It is about aesthetic value of the lakes. How the people admire the lakecity most not only the natives but also the tourists, who visit the city. Once you visit here it’s very hard to go back as the magic of the blue lakes and the appeasing culture capture your mind, body and soul so nicely that you can fall in the love of the natural beauty.
Udaipur is located in the lap of lush green Aravalli hills. Due to the lakes and natural setting Udaipur is the most beautiful city on the planet. Udaipur is heaven and called Venice of the East.
In monsoon the lakes are full and overflowing. Natives have deep attachments to the lakes. I observed that during the monsoon the moods of the lakes and natives are on same wavelength.